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भारतीय संविधान अनुच्छेद 74 से 78, 148 से 167 और 352-360 | PM, राज्यपाल, CAG और आपातकाल

Episode 5 UPSC SSC State PCS

भारतीय संविधान अनुच्छेद 74 से 78, 148 से 167 और 352-360: PM, राज्यपाल, CAG और आपातकाल

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद से लेकर राज्यपाल, CAG और राष्ट्रीय, राष्ट्रपति शासन एवं वित्तीय आपातकाल तक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रावधान आसान भाषा में।

Bhartiya Samvidhan Aapatkal Anuchhed 352 356 360 भारतीय संविधान का एक महत्वपूर्ण topic है। Emergency को समझने के लिए केवल Articles 352, 356 और 360 ही नहीं, बल्कि Articles 353, 354, 355, 357, 358 और 359 को भी समझना जरूरी है।
Updated: 05 September 2026 | Current Constitutional Provisions के अनुसार Updated Notes

इस पोस्ट में हम Articles 74–78 के तहत प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद, Articles 148–151 के तहत CAG, Articles 153–167 के तहत राज्य कार्यपालिका और Articles 352–360 के तहत आपातकालीन प्रावधानों को समझेंगे।

👨‍💼 प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद — अनुच्छेद 74–78

अनुच्छेद 74 — राष्ट्रपति को सहायता और सलाह

राष्ट्रपति की सहायता और सलाह के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होगी।

राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है। लेकिन पुनर्विचार के बाद दी गई सलाह के अनुसार कार्य करना राष्ट्रपति के लिए आवश्यक है।

Exam Point: 42वें संविधान संशोधन ने राष्ट्रपति द्वारा मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करने की व्यवस्था को मजबूत किया और 44वें संशोधन ने एक बार पुनर्विचार का प्रावधान जोड़ा।

अनुच्छेद 75 — प्रधानमंत्री और मंत्री

  • प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।
  • अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर करता है।
  • मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • कोई व्यक्ति मंत्री बनकर अधिकतम 6 महीने तक संसद के किसी सदन का सदस्य बने बिना रह सकता है; उसके बाद सदस्यता आवश्यक है।
  • प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती।

अनुच्छेद 76 — भारत का महान्यायवादी

भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। उसमें वही योग्यता होनी चाहिए जो Supreme Court के Judge के रूप में नियुक्त होने के लिए आवश्यक है।

  • भारत सरकार का प्रमुख विधि अधिकारी।
  • राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है।
  • भारत सरकार को कानूनी मामलों में सलाह देता है।
  • भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार है।
  • Article 88 के तहत संसद में बोल और भाग ले सकता है, लेकिन केवल इस Article के आधार पर मतदान का अधिकार नहीं मिलता।

अनुच्छेद 77 — भारत सरकार के कार्यों का संचालन

भारत सरकार की executive actions राष्ट्रपति के नाम से व्यक्त की जाती हैं। राष्ट्रपति सरकारी कार्यों के सुविधाजनक संचालन तथा मंत्रियों के बीच कार्यों के आवंटन के लिए नियम बनाता है।

अनुच्छेद 78 — प्रधानमंत्री के राष्ट्रपति के प्रति कर्तव्य

  • मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राष्ट्रपति को देना।
  • संघ के प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से संबंधित जानकारी देना।
  • राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना।
  • राष्ट्रपति की आवश्यकता पर किसी मंत्री द्वारा लिए गए लेकिन मंत्रिपरिषद द्वारा विचार न किए गए विषय को परिषद के सामने रखना।
74 = Advice

राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद की सलाह।

75 = Ministers

PM, Ministers और Collective Responsibility।

76 = Attorney General

भारत का प्रमुख विधि अधिकारी।

77–78 = Government Business

सरकारी कार्य और PM की राष्ट्रपति को सूचना।

🧾 CAG — अनुच्छेद 148 से 151

अनुच्छेद 148 — नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक

भारत के Comptroller and Auditor-General of India (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

CAG की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए संविधान में उसके पद और हटाने की प्रक्रिया के संबंध में विशेष सुरक्षा दी गई है।

CAG को उसी प्रकार की प्रक्रिया से हटाया जाता है जिस प्रकार Supreme Court के Judge को हटाया जाता है।

अनुच्छेद 149 — CAG के कर्तव्य और शक्तियां

CAG के duties और powers को संसद द्वारा बनाए गए कानून के माध्यम से निर्धारित किया जाता है।

अनुच्छेद 150 — Accounts का Form

Union और States के accounts किस form में रखे जाएंगे, यह राष्ट्रपति CAG की सलाह पर निर्धारित करता है।

अनुच्छेद 151 — CAG Reports

Union से संबंधित CAG reports राष्ट्रपति को प्रस्तुत की जाती हैं, जो उन्हें संसद के प्रत्येक सदन के सामने रखवाता है।

State से संबंधित reports राज्यपाल को दी जाती हैं, जो उन्हें राज्य विधानमंडल के सामने रखवाता है।

Article विषय Exam Keyword
148 CAG का पद Appointment + Independence
149 CAG Duties & Powers Parliament द्वारा law
150 Form of Accounts President + CAG advice
151 Audit Reports President/Governor → Legislature

🏛️ भाग VI: राज्य कार्यपालिका — अनुच्छेद 153–167

अनुच्छेद 153 — राज्यपाल

प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा। एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल भी नियुक्त किया जा सकता है।

अनुच्छेद 154 — राज्य की Executive Power

राज्य की executive power राज्यपाल में निहित होती है और वह इसका प्रयोग संविधान के अनुसार स्वयं या अपने अधीन अधिकारियों के माध्यम से करता है।

अनुच्छेद 155 — राज्यपाल की नियुक्ति

राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। राज्यपाल का चुनाव जनता या राज्य विधानमंडल द्वारा नहीं होता।

अनुच्छेद 156 — कार्यकाल

  • राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है।
  • सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष है।
  • राज्यपाल अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को देता है।
  • उत्तराधिकारी के पद ग्रहण करने तक वह पद पर रह सकता है।

अनुच्छेद 157 — योग्यता

  • भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • कम से कम 35 वर्ष की आयु होनी चाहिए।

अनुच्छेद 158 — पद की शर्तें

  • राज्यपाल संसद या राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं हो सकता।
  • यदि कोई सदस्य राज्यपाल नियुक्त होता है, तो उसका सदन का स्थान रिक्त माना जाता है।
  • वह कोई अन्य office of profit नहीं रख सकता।

अनुच्छेद 159 — शपथ

राज्यपाल संविधान की रक्षा, संरक्षण और परिरक्षण तथा राज्य की जनता की सेवा और कल्याण के लिए शपथ या प्रतिज्ञान करता है।

अनुच्छेद 160 — आकस्मिक परिस्थितियां

ऐसी परिस्थिति में जिसके लिए इस अध्याय में कोई विशेष व्यवस्था नहीं है, राष्ट्रपति राज्यपाल के कार्यों के निर्वहन के लिए आवश्यक व्यवस्था कर सकता है।

अनुच्छेद 161 — राज्यपाल की क्षमादान शक्ति

राज्यपाल उन मामलों में pardon, reprieve, respite, remission तथा sentence को suspend, remit या commute कर सकता है जो राज्य की executive power से संबंधित कानूनों के अंतर्गत आते हैं।

अनुच्छेद 162 — Executive Power की सीमा

राज्य की executive power सामान्यतः उन विषयों तक विस्तृत होती है जिन पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है, संविधान और लागू कानूनों की सीमाओं के अधीन।

अनुच्छेद 163 — राज्यपाल को सहायता और सलाह

राज्यपाल की सहायता और सलाह के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद होगी।

UPSC Trap: यह कहना सही नहीं है कि राज्यपाल हर मामले में अपनी इच्छा से काम करता है। संविधान कुछ परिस्थितियों में विवेकाधीन भूमिका देता है, जबकि अन्य मामलों में संवैधानिक व्यवस्था मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर आधारित है।

अनुच्छेद 164 — मुख्यमंत्री और राज्य के मंत्री

  • मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करता है।
  • अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री की सलाह पर करता है।
  • राज्य मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
  • कोई व्यक्ति राज्य विधानमंडल का सदस्य बने बिना अधिकतम 6 महीने तक मंत्री रह सकता है।
  • मुख्यमंत्री सहित राज्य मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं हो सकती और 12 से कम नहीं हो सकती।

अनुच्छेद 165 — राज्य का महाधिवक्ता

राज्य के Advocate-General की नियुक्ति राज्यपाल करता है। उसमें वही योग्यता होनी चाहिए जो High Court के Judge बनने के लिए आवश्यक है।

अनुच्छेद 166 — राज्य सरकार के कार्य

राज्य सरकार की executive actions राज्यपाल के नाम से व्यक्त की जाती हैं। राज्यपाल सरकार के कार्यों के सुविधाजनक संचालन तथा मंत्रियों के बीच कार्यों के आवंटन के लिए नियम बनाता है।

अनुच्छेद 167 — मुख्यमंत्री के राज्यपाल के प्रति कर्तव्य

  • मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को देना।
  • राज्य प्रशासन और विधायी प्रस्तावों से संबंधित जानकारी देना।
  • राज्यपाल द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना।
  • राज्यपाल की आवश्यकता पर किसी मंत्री द्वारा लिए गए लेकिन मंत्रिपरिषद द्वारा विचार न किए गए विषय को परिषद के सामने रखना।

🧠 Articles 153–167 Quick Revision

153 = Governor Start
154 = Executive Power
155 = Appointment
156 = Term
157 = Qualification
158 = Conditions
159 = Oath
160 = Contingency
161 = Pardon
162 = Executive Power Extent
163 = Council Advice
164 = CM & Ministers
165 = Advocate-General
166 = State Government Business
167 = CM → Governor

🚨 Bhartiya Samvidhan Aapatkal — Articles 352 से 360

Emergency provisions भारतीय संविधान के Part XVIII में हैं। परीक्षा के लिए 352, 356 और 360 के साथ बीच के Articles को भी समझना जरूरी है।

Article 352

National Emergency

Article 356

President’s Rule

Article 360

Financial Emergency

अनुच्छेद 352 — राष्ट्रीय आपातकाल

यदि राष्ट्रपति को यह समाधान हो कि भारत या उसके किसी भाग की सुरक्षा युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह से खतरे में है, तो National Emergency की Proclamation जारी की जा सकती है।

Important: 1975 की Emergency में “internal disturbance” आधार था। 44वें संविधान संशोधन के बाद Article 352 में यह आधार “armed rebellion” किया गया।

संसद की मंजूरी

Proclamation को संसद के दोनों सदनों द्वारा एक महीने के भीतर approve किया जाना आवश्यक है।

Approval के लिए विशेष बहुमत आवश्यक है: सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का कम से कम दो-तिहाई।

अवधि

Approval के बाद Emergency एक बार में अधिकतम 6 महीने तक जारी रह सकती है और आगे जारी रखने के लिए Parliamentary approval आवश्यक है।

अनुच्छेद 353 — Emergency का प्रभाव

National Emergency के दौरान Union की executive power राज्यों को directions देने तक विस्तृत हो सकती है।

Parliament की legislative power भी संविधान में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार राज्यों से संबंधित विषयों तक विस्तृत हो सकती है।

अनुच्छेद 354 — Revenue Distribution

Emergency के दौरान राष्ट्रपति Union और States के बीच revenue distribution से संबंधित constitutional provisions में निर्धारित सीमाओं के भीतर modifications कर सकता है।

अनुच्छेद 355 — Union का राज्यों के प्रति कर्तव्य

Union का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य को बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से बचाए तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के अनुसार चलाई जाए।

Exam Link: Article 355 और Article 356 आपस में जुड़े topics हैं, लेकिन दोनों एक ही provision नहीं हैं।

अनुच्छेद 356 — राष्ट्रपति शासन

यदि राष्ट्रपति को राज्यपाल की report या अन्यथा उपलब्ध information के आधार पर यह समाधान हो कि राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा सकती, तो Article 356 के तहत Proclamation जारी की जा सकती है।

संसद की मंजूरी

Proclamation को संसद के दोनों सदनों से 2 महीने के भीतर approve कराया जाना आवश्यक है।

मुख्य प्रभाव

  • राष्ट्रपति राज्य सरकार के कुछ या सभी कार्य अपने हाथ में ले सकता है।
  • राज्य विधानमंडल की शक्तियां Parliament द्वारा या उसके authority के तहत exercise की जा सकती हैं।
  • High Court की powers राष्ट्रपति अपने हाथ में नहीं ले सकता।
Important: Article 356 को केवल “राज्यपाल शासन” कहना technically precise नहीं है। यह President’s Rule है।

अनुच्छेद 357 — Legislative Powers

Article 356 की Proclamation के दौरान राज्य विधानमंडल की legislative powers Parliament द्वारा या Parliament के authority के तहत exercise की जा सकती हैं।

अनुच्छेद 358 — Article 19

Article 358 का संबंध Article 19 से है।

वर्तमान constitutional व्यवस्था के अनुसार Article 19 से संबंधित यह protection/suspension केवल उस National Emergency से जुड़ा है जो war या external aggression के आधार पर घोषित की गई हो।

अनुच्छेद 359 — Fundamental Rights के Enforcement पर प्रभाव

राष्ट्रपति Emergency के दौरान Order द्वारा Part III में दिए गए specified Fundamental Rights के enforcement के लिए courts में जाने के अधिकार को suspend कर सकता है।

Golden Exam Point:
Article 358 → Article 19 से विशेष संबंध
Article 359 → specified Fundamental Rights के enforcement के लिए court approach करने के अधिकार से संबंधित
Articles 20 और 21 → Article 359 के तहत सुरक्षित

अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल

यदि राष्ट्रपति को यह समाधान हो कि भारत या उसके किसी भाग की financial stability या credit संकट में है, तो Financial Emergency की Proclamation जारी की जा सकती है।

संसद की मंजूरी

Proclamation को संसद के दोनों सदनों से 2 महीने के भीतर approve कराया जाना आवश्यक है।

मुख्य प्रभाव

  • Union राज्यों को financial propriety से संबंधित principles follow करने के लिए directions दे सकता है।
  • राज्य के कर्मचारियों के salaries और allowances से संबंधित directions दिए जा सकते हैं।
  • Union के कर्मचारियों के salaries और allowances में reduction से संबंधित directions दिए जा सकते हैं।
  • Supreme Court और High Court के Judges भी इसमें शामिल हो सकते हैं।
Fact: भारत में Article 360 के तहत Financial Emergency अब तक घोषित नहीं की गई है।

📊 Article 352 vs 356 vs 360

Point 352 356 360
नाम National Emergency President’s Rule Financial Emergency
आधार War / External Aggression / Armed Rebellion Constitutional machinery failure Financial stability or credit threatened
क्षेत्र भारत या उसका कोई भाग संबंधित राज्य भारत या उसका कोई भाग
Approval 1 महीना 2 महीने 2 महीने
मुख्य Majority Special Majority Simple Majority Simple Majority
Article 20/21 Article 359 के तहत सुरक्षित Direct effect नहीं Direct effect नहीं
भारत में स्थिति 3 बार कई बार अब तक कभी नहीं

🧠 Emergency Trick

352 = Nation → देश की सुरक्षा
356 = State → राज्य की Constitutional Machinery
360 = Money → Financial Stability

Approval: 352 → 1 Month | 356 → 2 Months | 360 → 2 Months

🎯 UPSC / SSC High-Yield MCQs

Q1. Article 352 के तहत National Emergency किस आधार पर घोषित की जा सकती है?

A. Internal disturbance only
B. War, external aggression or armed rebellion
C. Financial instability only
D. Constitutional machinery failure

उत्तर: B — War, external aggression या armed rebellion.
Q2. Article 356 की Proclamation को संसद से कितने समय में approve करना होता है?

A. 1 महीना
B. 2 महीने
C. 3 महीने
D. 6 महीने

उत्तर: B — 2 महीने.
Q3. Article 360 किससे संबंधित है?

A. National Emergency
B. President’s Rule
C. Financial Emergency
D. Constitutional Amendment

उत्तर: C — Financial Emergency.
Q4. Article 359 के तहत किन Articles के enforcement को suspend नहीं किया जा सकता?

A. 14 और 19
B. 19 और 22
C. 20 और 21
D. 15 और 16

उत्तर: C — Articles 20 और 21.
Q5. Article 358 मुख्यतः किस Article से संबंधित है?

A. 14
B. 19
C. 21
D. 32

उत्तर: B — Article 19.
Q6. राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?

A. प्रधानमंत्री
B. मुख्यमंत्री
C. राष्ट्रपति
D. राज्य विधानमंडल

उत्तर: C — राष्ट्रपति.
Q7. राज्यपाल बनने के लिए न्यूनतम आयु कितनी है?

A. 25 वर्ष
B. 30 वर्ष
C. 35 वर्ष
D. 40 वर्ष

उत्तर: C — 35 वर्ष.
Q8. Article 148 किससे संबंधित है?

A. Attorney General
B. CAG
C. Governor
D. Advocate General

उत्तर: B — CAG.
Q9. केंद्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी है?

A. राष्ट्रपति
B. राज्यसभा
C. लोकसभा
D. Supreme Court

उत्तर: C — लोकसभा.
Q10. Article 74 के तहत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह के साथ क्या कर सकता है?

A. हमेशा reject कर सकता है
B. एक बार reconsideration के लिए वापस भेज सकता है
C. Supreme Court को भेज सकता है
D. सलाह को हमेशा ignore कर सकता है

उत्तर: B — एक बार पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकता है।
Q11. भारत में Financial Emergency अब तक कितनी बार घोषित हुई है?

A. 1 बार
B. 2 बार
C. 3 बार
D. कभी नहीं

उत्तर: D — कभी नहीं.
Q12. Article 163 किससे संबंधित है?

A. Governor को aid and advise करने वाली Council of Ministers
B. CAG
C. President’s Rule
D. Finance Commission

उत्तर: A.
Q13. State Advocate-General से संबंधित Article कौन-सा है?

A. 76
B. 148
C. 165
D. 167

उत्तर: C — Article 165.
Q14. Article 355 किससे संबंधित है?

A. राज्यपाल की नियुक्ति
B. Union का राज्यों की रक्षा और constitutional government सुनिश्चित करने का कर्तव्य
C. Financial Emergency
D. CAG

उत्तर: B.
Q15. National Emergency की Proclamation को संसद से कितने समय में approval चाहिए?

A. 15 दिन
B. 1 महीना
C. 2 महीने
D. 6 महीने

उत्तर: B — 1 महीना.

⚡ One-Minute Revision

Article एक लाइन में याद रखें
74President + Council of Ministers Advice
75PM/Ministers + Collective Responsibility
76Attorney-General
77Union Government Business
78PM → President Information
148CAG
149CAG Duties & Powers
150Form of Accounts
151CAG Reports
153Governor
155Governor Appointment
156Governor Term
157Governor Qualification
161Governor Pardon
163State Council of Ministers
164CM & State Ministers
165Advocate-General
167CM → Governor
352National Emergency
353Effect of National Emergency
355Union Duty towards States
356President’s Rule
357Legislative Powers during 356
358Article 19
359FR Enforcement
360Financial Emergency

📚 भारतीय संविधान Series

📖 Constitution Overview

22 Parts और 12 Schedules

⚖️ Fundamental Rights

Articles 12–35

📜 DPSP + Fundamental Duties

Articles 36–51A

🏛️ President + Parliament

Articles 52–122

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❓ Frequently Asked Questions

Article 352 क्या है?

Article 352 National Emergency से संबंधित है। इसे युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर घोषित किया जा सकता है।

Article 356 क्या है?

Article 356 उस स्थिति से संबंधित है जब किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा सकती। इसे President’s Rule कहा जाता है।

Article 360 क्या है?

Article 360 Financial Emergency से संबंधित है, जब भारत या उसके किसी भाग की financial stability या credit संकट में हो।

क्या भारत में Financial Emergency कभी लगी है?

नहीं। भारत में Article 360 के तहत अब तक Financial Emergency घोषित नहीं की गई है।

National Emergency को संसद से कितने समय में मंजूरी चाहिए?

Article 352 की Proclamation को संसद के दोनों सदनों से एक महीने के भीतर approval चाहिए।

President’s Rule को संसद से कितने समय में मंजूरी चाहिए?

Article 356 की Proclamation को दो महीने के भीतर संसद के दोनों सदनों से approval चाहिए।

क्या Articles 20 और 21 Emergency में सुरक्षित हैं?

हाँ। Article 359 के तहत Articles 20 और 21 के enforcement को suspend नहीं किया जा सकता।

राज्यपाल की नियुक्ति कौन करता है?

Article 155 के अनुसार राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

CAG की नियुक्ति कौन करता है?

Article 148 के अनुसार CAG की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

📌 Official Source

इस पोस्ट के constitutional provisions को भारत सरकार के Legislative Department द्वारा उपलब्ध Constitution of India के current text के आधार पर तैयार किया गया है।

भारत सरकार — Legislative Department

Constitution Amendments — Official Page

⚠️ Disclaimer — महत्वपूर्ण सूचना

यह पोस्ट केवल educational और informational purpose के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य किसी सरकारी विभाग, आयोग या संवैधानिक संस्था का आधिकारिक प्रतिनिधित्व करना नहीं है।

संवैधानिक प्रावधानों में समय के साथ संशोधन हो सकते हैं। Legal, administrative या official purpose के लिए हमेशा भारत सरकार के official constitutional text और संबंधित कानून/अधिसूचना को प्राथमिक स्रोत मानें।

Data Digest किसी परीक्षा के प्रश्न, परिणाम या चयन की गारंटी नहीं देता।

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Indian Constitution Series • Episode 5 • Updated 05 September 2026

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